जनवरी का महीना और खेती की तैयारी
जाने-माने कृषि विशेषज्ञ इंद्रपाल यादव के अनुसार, जनवरी का महीना किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आता है। यदि आपके पास खाली खेत हैं और आप पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं, तो सब्जियों की खेती आपके लिए बंपर कमाई का जरिया बन सकती है। खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की अच्छी तैयारी, देसी खाद (वर्मी कंपोस्ट) और संतुलित रासायनिक खादों (DAP, पोटाश, यूरिया, सल्फर) का उपयोग करना अनिवार्य है। उत्तर भारत के ठंडे इलाकों में फसलों को पाले से बचाने के लिए ‘क्रॉप कवर’ या ‘टनल विधि’ का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
जनवरी में उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियां
१. भिंडी (Okra): जनवरी के आखिरी सप्ताह (२०-२५ जनवरी) में भिंडी लगाना सबसे अधिक फायदेमंद है। अगेती भिंडी बाजार में ५० से ७० रुपये प्रति किलो तक बिकती है। एक एकड़ में भिंडी की खेती से २.५ से ३ लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है। २. शिमला मिर्च (Capsicum): जनवरी के पहले सप्ताह में शिमला मिर्च लगाना लाभकारी है। अच्छी गुणवत्ता वाली किस्मों के चयन से बाजार में ४०-५० रुपये प्रति किलो के औसत भाव मिल सकते हैं। ३. हरी मिर्च (Green Chilli): मिर्च की खेती पूरे साल चलती है। जनवरी में लगाई गई मिर्च से प्रति एकड़ ३ लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है। ४. ग्वार फली (Cluster Beans): इस सब्जी में रोग कम लगते हैं और शुरुआत में इसके दाम १०० रुपये प्रति किलो तक मिल सकते हैं, जो बाद में २५-३० रुपये तक स्थिर रहते हैं।
बेल वाली फसलें और नकदी फसलें
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खीरा और लौकी: मल्चिंग पेपर और बेड विधि से खीरा लगाने पर ३०-४० रुपये प्रति किलो के दाम मिल सकते हैं। लौकी और तोरई (गिलकी) भी इस सीजन में जबरदस्त मुनाफा देने वाली फसलें हैं।
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तरबूज और खरबूजा: जनवरी में तरबूज और खरबूजे की बुवाई करने से गर्मियों की शुरुआत में अच्छी फसल मिलती है। विशेषकर रमजान के महीने में इनकी मांग और दाम दोनों ही बहुत अधिक रहते हैं।
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टमाटर और फूलगोभी: टमाटर किसानों को रातों-रात अमीर बना सकता है। वहीं, कम खर्च में अधिक वजन देने वाली फूलगोभी भी जनवरी में लगाई जा सकती है।
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प्याज: २०२५ में प्याज के कम दाम मिलने के कारण २०२६ में इसकी बुवाई का रकबा घटने की संभावना है, ऐसे में अगेती प्याज की खेती भविष्य में अच्छे दाम दिला सकती है।
विशेष सुझाव और प्रबंधन
कृषि विशेषज्ञ का मानना है कि मल्चिंग पेपर और ड्रिप इरिगेशन के प्रयोग से न केवल खरपतवार कम होते हैं, बल्कि फसल की ग्रोथ भी तेजी से होती है। यदि खेत में ‘निमेटोड’ (Nematode) की समस्या है, तो बुवाई से पहले कार्टाप हाइड्रोक्लोराइड या कार्बोफ्यूरान का इस्तेमाल जरूर करें। सही समय पर सही किस्म का चयन और उचित बाजार प्रबंधन ही किसान को कर्ज से मुक्ति दिलाकर खुशहाली की ओर ले जा सकता है।



